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पहली बार दाबोचा गया खाकी वर्दी वाला नक्सली, सजिश को भी कर दिया फेल मास्टर प्लानर एसपी डाक्टर अभिषेक पल्लव ने ।

सीएफ कैंप से चोरी हुए दो एसएलआर व 70 राउंड जिंदा कारतूस भी बरामद। पुलिस अधिकारियों को चौंका दिया इन भेदियों ने, खुद के आरक्षकों ने किया ऐसा


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दंतेवाड़ा। गीदम थाना क्षेत्र के कासौली में स्थित सीएफ कैंप के एक आरक्षक ने आधिकारियों की पिछले 48 घंटे से नींद उड़ा रखी थी। एक दर्जन से अधिक जवानों से पूछताछ के बाद एक आरक्षक का नाम सामने आया है। नाम है आरक्षक राजू कुजूर। कड़ाई से पूछताछ हुई तो बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ। राजू ने पुलिस को बताया कि नक्सली लीडरों से एसएलआर का सौदा हुआ था। एक की कीमत वे ढाई लाख रुपए दे रहे थे। दो को बेचने पर पांच लाख रुपए मिलना था। ये दोनों हथियार वहां तक नही ले जा सका।

 उजागर हुई खाकी वार्दी वाले नक्सली की रणनीति से पुलिस अधिकारी भी भौचक हैं। जब ख्ुाद के आरक्षक इस तरह के कार्यो में सलिप्त है तो लाजमी है समर्पण करने वाले नक्सलियों का पुलिस के प्रति समर्पण सवालों के घेरे में ही रहेगा।  हालांकि पुलिस थोड़ी से चैन की सांस ले रही है। चोरी हुई दोनों एसएलआर को बरामद कर लिया गया है। साथ ही 70 राउंड जिंदा कारतूस और चार मेगजीन भी बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस अधीक्षक डॉ अभिषेक पल्लव ने पे्रसवार्ता के दौरान मंगलवार शाम को बताया है।

पूरी तैयारी कर चोरी की थी बंदूक :

6 तारीक्ष की रात को राजू कुजूर कैंप परिसर में चोरी से दाखिल हुआ। एसएलआर को चोरी करने के लिए 15 दिन की छुट्टी ले रखी थी। उसने सो रहे  आरक्षक राजेंद्र प्रसाद और दया शंकर रजक के हथयारों को पार किया। कैंप से फरार होने के बाद भैरमगढ़ के उड़सा गांव पहुंचा। वहां एक महुआ पेड़ के नीचे हथियार व राउंड को छुपा दिया। पुलिस को इस पर शक इस लिए और हुआ छुट्टी के दौरान भी कैंप के इर्दगिर्द चक्कर काटता था। उसके नंबर को सर्विलांस पर रखा गया, तो पता चला कि नक्सलियों के कई बड़े नेताओं स उसकी बातचीत होती थी। पुलिस अधिकारियों ने आरक्षक के दोस्त बेट्टी नेताम से भी पूछताछ की है। उसकी निशान देही पर पूरे मामले का खुला हो सका।

 कैंप का मिला ब्लू प्रिंट, लूटना चाहता था शास्त्रागार:

 पूरे कैंप पर हमला करने का व्यूह रचना इस खाकी वर्दी वाले नक्सली ने कर दी थी। प्रेसवार्ता के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है। आरोपी आरक्षक के पास कैंप का ब्लू प्रिंट मिला है। इस नक् शे में बैरक से लेकर कैंप की तमाम गतिविधियों को इंगित किया गया है। पूछताछ में उसने पुलिस अधिकारियों को बताया कि इंद्रावती नदीपार का कमांडर मल्लेश के साथ उसकी तीन मीटिंग हुई है। उस मीटिंग में ही कैंप पर हमला कर हथियारों को लूटने का प्लान तैयार हुआ था।


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