एक दर्जन से अधिक जवानों के दामन पर दाग, वर्दी को दागदार बता रहा पकड़ा गया आरोपी आरक्षक कई बार अपने साथियों के लिए मौत का सामन इन जवानो ने पहुंचाया नक्सलियों तक

प्रेसवार्ता के दौरान एसपी ने कहा जंगल व अर्बन से ज्यदा खतरनाक है पुलिस नक्सली। पुलिस नक्सल की स्माल एक्शन टीम जबांज जवानों के बीच करती है काम।


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बस्तरक्रान्ति बिग ब्लास्ट।

दंतेवाड़ा। बस्तर के इस अघोषित युद्ध में जांबाज जवानो की वीरता के किस्से सामने आए। जंगल नक्सल और अर्बन नक्सल यहां काम कर रहा है, लेकिन पुलिस नक्सली भी काम कर रहे है, यह चौंका देने वाली बात है। पकडे गए आरक्षक राजू कुजूर ने कबूल किया है कि बीजापुर- दंतेवाड़ा में एक दर्जन से अधिक जवान दागदार है। इनके दामन अपने ही साथियों की मौत की साजिश रचने का आरोप है। प्रेसवार्ता के दौरान एसपी ने कहा कि पकडे गए आरोपी आरक्षक ने इस तरह के साथी जवानो के नाम बताए है। इस जवान ने यह भी कहा कि कारतूस नक्सलियों तक पहुंचाने का काम कर रहे है। बेहद संवेदनशील मामले पर जल्द ही  जांच कर बड़ी कारवाई की जाएगी।

संत्री डटे रहे, मोर्चा तना रहा, कैम्प में आधा दर्जन से अधिक जवान सुरक्षा में रहे तैनात ,फिर भी घुस आया रात 11 बजे ये पुलिस नक्सली

सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कैम्प तो है टारगेट में, 300 परिवार वे भी है जो राहत शिविर में रह रहे है। कैम्प की सुरक्षा में आधा दर्जन से अधिक जवानों की ड्यूटी संत्री से लेकर मोर्चा तक रहती है। इन सभी की आँखों में धुल झोंक कर पुलिस नक्सली राजू कुजूर दाखिल हो गया भनक तक नही लगी। रात 11 बजे इस तरह घुसना मोर्चा पर तैनात जवान भी सवालों के घेरे में हैं।

ब्लू प्रिंट को अंजाम दिया तो हाथ ना आएगा कुछ, झेलना होगा बड़ा नुकसान

जिस प्लानिंग का जिक्र प्रेसवार्ता में किया गया है वह मुरकी घटना की याद दिलाता है
प्रेसवार्ता में पकडे गए इस आरक्षक के पास से कैम्प का नक्शा मिला है। पूछताछ में उसने साफ़ कहा कि कैम्प को लूटने की प्लानिंग थी। 15 दिन की छूटी ले कर इसी काम में भिड़ा था। यदि नक्सली अपने मंसूबो में कामयाब हो जाते तो बीजापुर का मुरकी कैम्प की घटना की पुरणावृत्ति होती। इस तरह के खतरनाक मंसूबों को मन में पाल कर रखने वालो पर पड़ताल के बाद कारवाई की बात अधिकारीयों की समझ से परेय वे जाबांज जवान कह रहे जिन्होंने कई बार गोली खाई है और नक्सलियों के विस्फोटों में घायल हुए है। खुलकर आब भी अनुशासन के डंडे के चलते नहीं बोल रहे है।

कैम्प के उस पार माओवाद का बोलबाला
कसौली कैम्प के उस पार नदी है। इस नदी को पार करते ही नक्सली मजबूत है। कमांडर मल्लेश का यहां की पंचायतों में दबदबा बतया जाता है। यह भी कहा जा रहा है कि भेद लेने के लिए वह भी कई बार यहां दस्तक दे चुका है। इतना ही नहीं एक बार फ़ोर्स की राडार पर कासौली में ही चढ़ा था। उस दौरान थाना प्राभारी विनोद तिवारी ने उस पर फायर किये थे। पुलिस ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि कमांडर मल्लेश ही था। कैम्प स्थापना के बाद भी बड़े कमांडर का आना इशारा करता है कि कैम्प के दागदार जवान मददगार थे।


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