सिरोही नस्ल का मिनी अभ्यारण्य बियाबान होने के कगार पर।


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धीरज पांडेय@बस्तर क्रांति । राष्ट्रपति को दिखाने के लिए हुआ था मिनी अभ्यारण्य तैयार। 22 एकड़ भूमि पर बना है समन्वित कृषि प्रणाली मॉडल विलेज। राजस्थान से लाई गई 45 बकरियों में से आधी हो गई बीमारी में साफ। दंतेवाड़ा। बस्तर क्रांति ब्यूरो गीदम ब्लॉक के ग्राम हीरानार में सरकार ने समन्वित कृषि प्रणाली मॉडल तैयार किया है। 22 एकड़ परिक्षेत्र में खेती- किसानी से लेकर कुक्कुट, पशु और मत्स्य पालन भी शुरू किया गया। इस मॉडल ग्राम का अवलोकन 25 जुलाई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी पत्नी सविता कोविंद के साथ किया था। तब उन्होंने इस परिकल्पना की प्रशंसा करते किसानों को प्रोत्साहित किया था। अधिकारियों ने राष्ट्रपति को बताया था कि यहां की आबोहवा में कड़कनाथ कुक्कुट सहित साहीवाल गाय, बतख और राजस्थान के सिरोही नस्ल की बकरियां स्वस्थ हैं और बढ़ोतरी होगी। इन परियोजना की मॉनीटरिंग पशुधन विकास विभाग के साथ कृषि विज्ञान केंद्र गीदम को दी गई थी। अहम रोल कृषि विज्ञान केंद्र का था। समन्वित कृषि प्रणाली मॉडल में पांच एकड़ भूमि में सिरोही नस्ल की बकरियों के लिए मिनी अभ्यारण्य तैयार किया गया। विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 45 बकरियां अभ्यारण्य में रखी गई थी। इनमें से आधी बकरियों की मौत हो चुकी है। बताया यह भी जा रहा है कि राष्ट्रपति दौरे के एक दिन पहले से ही बकरियों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया था। दो बकरियों की मौत उसी दौरान बीमारी से हो गई थी। दबी जुबान संबंधित किसान बताते हैं कि राष्ट्रपति प्रवास के बाद से करीब दो दर्जन से अधिक बकरियों की मौत बीमारी से हो गई है। बीमारी की जानकारी केवीके और वेटनरी विभाग को दी गई थी। अधिकारी- कर्मचारी अभ्यारण्य में आए और अवलोकन भी किया लेकिन बकरियों को बचा नहीं पाए। बाक्स रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक योजनाओं के क्रियान्वयन में जुटे कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ वैज्ञानिक अपनी रिसर्च छोड़कर शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में जुटे हैं। मूल कार्य खेती- किसानी के लिए मिट्टी परीक्षण, जलवायु के अनुसार फसल उत्पादन, बीजों का अनुसंधान, कीट- पंतगों से फसलों को बचाने के तरीके किसानों को उपलब्ध कराना है। लेकिन केवीके के अधिकारी- वैज्ञानिक शोध का काम छोड़कर कुक्कुटपालन, पशुपालन और हालर मिल वितरण कार्य में जुटे हैं। पिछले दो वर्षों से इस केंद्र में शोध पर कोई विशेष कार्य नहीं हुए हैं।
यह कहा विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक ने केवीके गीदम के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. नारायण साहू ने बताया कि समन्वित प्रणाली मॉडल विलेज में सिरोही नस्ल की 45 बकरियां लाई गई थी। इन सभी बकरियों को किसानों के समूह को सौंप दिया गया था। कितनी बकरियों की मौत हुई है, मालूम नहीं। किस बीमारी से इन बकरियों की मौत हुई है, उस बीमारी का नाम याद नहीं आ रहा है।



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