एक दशक से जमे सिपाही का रौब थानेदार जैसा..

एक दशक में चार एसपी बदले पर इन सिपाहियों की कुर्सी डिगी तक नहीं


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दंतेवाड़ा @ बस्तर क्रांति गीदम थाना में पदस्थ दो सिपाहियों के खिलाफ पुलिस कप्तान को आवेदन सौंपा गया है। इस शिकायती पत्र में दोनों सिपाहियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस पर रिश्वत का खून लगने का आरोप तो पुराना है। नई बात यह है कि इन दानों में एक सिपाही तो एक दशक से थाने में डटा है। एक दशक में आधा दर्जन आईपीएस बदल गए, लेकिन इन दानों की कुर्सी स्थान से हिली तक नहीं।  

 शिकयी आवेदन पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों को दिया गया है। जिसमें बताया गया कि प्रधान आरक्षक आशीष नाग एवं नागेंद्र वर्मा लंबे समय से गीदम थाना क्षेत्र में पदस्थ हैं। आशीष नाग अगस्त 2009 से सितंबर 2014 तक लगातार यहां पदस्थ थे। इसके बाद उनका ट्रांसफर हुआ लेकिन उन्होंने नई पदस्थापना स्थल पर ज्वाइनिंग नहीं दी। आशीष नाग के बारे में बताया जाता है कि राजनैतिक पहुंच के चलते मई 2015 को फिर से गीदम थाने में पोस्टिंग करवाने के बाद आज तक जमे हुए हैं।

: रिपार्ट तभी लिखी जाएगी,चढ़ावा नाग तक पहुंचे

शिकायत कर्ता ग्रामीण रमेश, मुन्नराम, संतोष, राकेश आदि ने लिखित शिकायत में बताया है कि प्रधान आरक्षक ने गीदम के एक डाककर्मचारी के साथ मारपीट की, जब वह रिपोर्ट लिखवाने थाने पहुंचा तो वहां से भगा दिया गया। कहा जाता है चढावा नहीं मिला था। इसी तरह राखी त्यौहार के दौरान एक युवक को पान ठेले से उठाकर थाने में मारपीट की गई। नतीजा वही रहा। शिकायती पत्र के मुताबिक प्रधान आरक्षक नाग थाना क्षेत्र में जुआरी, सटोरियों और नशीली वस्तु विक्रेताओं से संरक्षण के नाम पर मोटी उगाही करता है। इसकी शिकायत पहले भी की जा चुकी है। इसी तरह उसके एक साथ आरक्षक नागेंद्र वर्मा का स्थानांतरण अरनपुर थाने में हो चुका है लेकिन वह अब तक गीदम थाने से रिलीव नहीं हुआ है। प्रार्थियों के दोनों पुलिस कर्मी लोगों को यह कहकर अपना धौंस जमाते हैं कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अधिकारी से लेकर नेता और मीडिया को हम अपने जेब में रखते है। इस थाने में जब तक चाहेंगे, तब तक रहेंगे।

 

          गीदम के आरक्षक और प्रधान आरक्षक के संबंध में शिकायत मिली है। मामले की जांच कराई जा रही है। यह जांच वे खुद कर रहे है। आरक्षकों के तबादलों की सूची जल्द ही निकल रही है। यदि दोषी है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। समय अवधि समाप्त हो चुकी है तो तबादला भी होगा।

चंद्रकांत गवर्ना, एसडीओपी


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