एक ऐसा बेटा.. जिसने कर दी मां और पिता की इच्छा पूरी मां ने कहा डॉक्टर बन जाओ और पिता बोले बनो आईपीएस

काबिल बेटा.... मां के कहने पर बना डॉक्टर और फिर पिता के सम्मान में आईपीएस अफसर अब समाज के दुश्मनों पर बरपा रहा गोली और भटके लोगों पर लगा रहा मरहम भी


0
1 share

बिहार का बेगुसराय जिला है तो बहुत छोटी जगह लेकिन यहां से देश को कई नामचीन नेता और अधिकारी मिले। इसी बेगुसराय से एक ऐसा बेटा भी निकला, जिसने मां के मुख से निकले अल्फाजों को अपना धर्म माना और पिता के कहे शब्दों को अपना कर्तव्य। उनकी इच्छा को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया। इस धर्म और कर्तव्य ने उसे अब एक नई पहचान के साथ देश और समाज की सेवा से जोड़ दिया है। डॉक्टरी की पढ़ाई के बाद देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान एम्स में छह साल लोगों की सेवा की। फिर पिता की आंखों में बेटे लिए पल रह आईपीएस के सपने को साकार कर दिया। अब वह नक्सलवाद के उस गढ़ में सेवाएं दे रहा है, जहां नक्सलियों ने देश को हिला देने वाली दर्जनों वारदातों को अंजाम दिया है। ताड़मेटला से लेकर झीरम कांड सोच भर लेने से रूह कांप उठती है। इस गढ़ में यह बेटा समाज के नासूर को उखाड़ फेंकने जुटा है।

हम बात कर रहे हैं इंसानों को पढऩे वाले आईपीएस डॉ. अभिषेक पल्लव की … बस्तर क्रांति के संपादक अब्दुल हमीद सिद्दीकी  से लोकतंत्र के पर्व पर हुई खास चर्चा….

बस्तर क्रांति- दंतेवाड़ा में आपकी पोस्टिंग ऐन चुनावी मौके पर हुई। नक्सल प्रभावित इस इलाके में शत प्रतिशत और सुरक्षित मतदान कराना चुनौती है, इस टास्क को पूरा करने क्या रणनीति अपनाएंगे?

– घटना फ्री चुनाव कराना पहला लक्ष्य होगा। इसके लिए संसाधनों को अभी से जुटाया जा रहा है। दस से पंद्रह हजार अतिरिक्त फोर्स की मांग की गई है। जिले में छह हजार जवान पहले से तैनात हैं। सेंसटिव, हाइपर सेंसटिव और नार्मल बूथों पर भी पैनी नजर रखी जाएगी। दंतेवाडा विधानसभा में 85 संवेदनशील, 157 अतिसंवेदनशील और 21 सामान्य बूथ हैं। 24 बूथों को शिफट किया जाएगा। आठ बूथों में मतदान दल को हेलीकाप्टर से भेजा जाता था, अब वे समाप्त हो चुके हैं।  पहली प्राथमिकता होगी इन बूथों में सफल मतदान करवाया जाए। जो कंपनियां बाहर से आएंगी, वहां डीआरजी के जवान और सीआरपीएफ के पुराने जवानों से मार्गदर्शन करवाया जाएगा। 

बस्तर क्रांति- दंतेवाडा में बतौर एसपी आपकी पहली पारी है। नक्सलवाद से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति बनाई गई है क्या?

– रणनीति को उजागर नहीं किया जा सकता है। लेकिन किरंदुल, भांसी, कुआकोंडा, अरनपुर, कटेकल्याण और बारसूर पर विशेष फोकस किया गया है। इन इलाकों में मेडिकल की तर्ज पर ऑपरेशन किए जाएंगे। जैसे एक सर्जन शरीर से खराब पार्ट अलग करता है, इसी पद्धति पर अंदरूनी गांव में नक्सलियों के मजबूत साथियों की सफाई की जाएगी। छोटे स्तर पर काम कर रहे नक्सलियों को समर्पण के लिए अपील की जाएगी। नहीं माने तो गिरफ-तारी की जाएगी। हार्डकोर माओवादियों को जवानों के गोलियों को सामना करना ही पडेगा।  इन हार्डकोर नक्सलियों की वजह से गांव का माहौल गंदा हुआ है। 

बस्तर क्रांति-  नक्सल संगठन में पुरूषों से ज्यादा खतरनाक महिलाएं मानी जाती है। सर्चिंग और गिरफतारियों के दौरान भी महिलाओं को नक्सली सामने करते है, इस समस्या से निपटने क्या उपाय होगा?

– हां यह सच है कि गांव और जंगल में नक्सली ग्रामीण महिलाओं को अपना कवच बनाकर फोर्स को उलझाते है। अब ऐसा मौका उन्हें नहीं दिया जाएगा। सर्चिंग और गिरफतारियों के दौरान महिला पुलिस कर्मी भी मौजूद रहेंगी। 

बस्तर क्रांति- आपरेशन में महिला फोर्स किस तरह से अपनी सहभागिता निभाएंगी? नक्सलवाद के खिलाफ जंगल में चार-चार दिन काटने पडते हैं।

– मुस्कुराते हुए बोले कि यह पुलिस की रणनीति है। किस तरह से महिला पुलिस कर्मियों से महिला नक्सलियों को मात दिलानी है, इसका खुलासा समय आने पर स्वत: हो जाएगा। महिला पुलिस कर्मियों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है लेकिन उनकी संख्या का खुलासा नहीं किया जाएगा।

बस्तर क्रांति- दक्षिण बस्तर का विकास सडकों के जाल से होकर गुजरेगा। पिछले चार सालों से स्टेट हाइवे 5 पर निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन पूरा नहीं हो सका। इस दौरान फोर्स का नुकसान भी बहुत हुआ। अरनपुर जगरगुंडा और बारसूर पल्ली रोड कब तक पूरा हो जाएगा?

– दक्षिण बस्तर का विकास सडकों से होकर ही अंदरूनी गांव तक पहुंचेगा। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। बरसात की वजह से अभी काम रूका हुआ है।  स्टेट हाइवे-5 जल्द ही बहाल होगा। नक्सलवाद से निपटने के लिए दस से बारह कैंप लोकसभा चुनाव तक स्थापित होने की संभावना है। नक्सलवाद की सांसे अंतिम पडाव की ओर है। गांव वाले भी समझ चुके हैं कि सडकों को काटने से उन्हीं को नुकसान उठाना पड रहा है। कटी सडकों से गांव तक राशन पहुंच पाता है और न ही एंबुलेंस, इसलिए अब ग्रामीण खुद सडक बनाने की पहल करने लगे है।

बस्तर क्रांति- आप पहले डॉक्टर थे, इस सेवा के क्षेत्र को छोड कर आईपीएस बने। इसके पीछे वजह क्या है?

– सेवा के क्षेत्र तो दोनों ही है। मां की इच्छा थी कि मैं डॉक्टर बनू। मां के मुख से निकले अल्फाज मेरे लिए धर्म से कम नहीं थे। इसलिए मेडिकल की पढाई की और छह साल तक चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दी। देश के सबसे बडे अस्पताल एम्स में पदस्थ रहकर गरीबों की सेवा की। लेकिन पिता की मंशा रही कि मैं फोर्स शामिल होकर देश के गद-दारों की सर्जरी करूं। मां के लिए डॉक्टर बना और पिता के लिए आईपीएस बनकर अपना कर्तव्य पूरा कर रहा हूं। 

बचपन से ही नाता रहा फोर्स के साथ 

आईपीएस डॉ अभिषेक पल्लव का नाता बचपन से ही फोर्स के ईर्दगिर्द रहा। पिता ऋषि कुमार डिफेंस में अफसर थे। मां आशादेवी गृहणी हैं। डॉ पल्लव के भाई भारतीय वन सेवा में अफसर हैं तो बहन डॉक्टर हैं। 1982 में जन्मे डॉ पल्लव का पैतृक गांव बिहार के बेगुसराय है। इनकी प्रारंरिभ शिक्षा देश के अलग- अलग राज्य के केंद्रीय विद्यालय में पूरी हुई। पीएमटी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद एमबीबीएस की पढाई और मास्टर की डिग्री हासिल की। इसके बाद दिल्ली के एम्स और राममनोहर लोहिया अस्पताल में छह साल तक अपनी सेवाए दी। वर्ष 2010 डॉक्टर कन्या से विवाह हुआ और छह वर्ष का पुत्र आद्विक पल्लव है।


Like it? Share with your friends!

0
1 share

What's Your Reaction?

hate hate
0
hate
confused confused
0
confused
fail fail
0
fail
fun fun
0
fun
geeky geeky
0
geeky
love love
0
love
lol lol
0
lol
omg omg
0
omg
win win
0
win

0 Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals